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दिवाली — महत्व, अनुष्ठान और मनाने का तरीका

दिवाली 2026 — प्रकाश का त्योहार। दिवाली की तिथि, महत्व, पूजा विधि और परंपराएं। भगवान राम की अयोध्या वापसी और अंधकार पर प्रकाश की विजय का उत्सव।

दिवाली — प्रकाश का महापर्व

दिवाली (दीपावली — अर्थात दीपों की पंक्ति) हिंदू धर्म का सबसे व्यापक रूप से मनाया जाने वाला त्योहार है। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पाँच दिवसीय महोत्सव प्रकाश, समृद्धि और आनंद का प्रतीक है। अमावस्या की घनी अंधेरी रात में जब हर घर में दीपों की रोशनी झिलमिलाती है, तो मन भाव-विभोर हो उठता है।

राम जी की वापसी

दिवाली के पीछे सबसे प्रचलित कथा है भगवान राम की अयोध्या वापसी। चौदह वर्ष के वनवास के बाद और रावण जैसे महाशक्तिशाली असुर पर विजय प्राप्त करने के बाद जब राम, सीता और लक्ष्मण अयोध्या लौटे, तो नगर के वासियों ने घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया। अंधेरी रात जगमगा उठी।

हर घर में जलता दीपक उसी स्वागत की पुनरावृत्ति है — जब अयोध्यावासियों ने धर्म के राजा के आगमन पर प्रकाश किया था।

दिवाली के पाँच दिन

पहला दिन — धनतेरस: माँ लक्ष्मी और धन्वंतरि (आयुर्वेद के देवता) की पूजा; सोना, चाँदी या बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।

दूसरा दिन — नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय का उत्सव; प्रातःकाल तेल लगाकर स्नान की परंपरा है।

तीसरा दिन — दिवाली (मुख्य रात): सूर्यास्त के बाद लक्ष्मी पूजा, दीपों का प्रकाश, आतिशबाजी और परिवार का मिलन।

चौथा दिन — गोवर्धन पूजा / पड़वा: भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने का उत्सव; कई परंपराओं में यह नव वर्ष का पहला दिन भी है।

पाँचवाँ दिन — भाई दूज: भाई-बहन के पवित्र प्रेम का उत्सव।

माँ लक्ष्मी का आगमन

दिवाली की रात माँ लक्ष्मी — धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी — को घर में आमंत्रित किया जाता है। घर के दरवाजे-खिड़कियाँ खुली रखी जाती हैं, दीपों और रंगोली से सजावट की जाती है और फूल, मिठाई और धूप-बत्ती से विधिपूर्वक पूजन होता है।

मान्यता है कि माँ लक्ष्मी दिवाली की रात पृथ्वी पर विचरण करती हैं और उन्हीं घरों में प्रवेश करती हैं जो स्वच्छ, प्रकाशमान और आनंद से भरे होते हैं। इसीलिए त्योहार से पहले घर की गहरी सफाई और सजावट की परंपरा है।

दिवाली का आध्यात्मिक अर्थ

इस पर्व का आध्यात्मिक संदेश उत्सव से कहीं गहरा है:

  • अंधकार पर प्रकाश: हर दीपक ज्ञान द्वारा अज्ञान के नाश का प्रतीक है
  • भीतर की दिवाली: दिवाली केवल घर नहीं, मन की सफाई का भी आह्वान है — पुराने मनमुटाव, नकारात्मक विचार और संकीर्ण भावनाओं को छोड़ने का समय
  • आकाश में फूटती आतिशबाजी उस आनंद की प्रतिध्वनि है जो अविद्या (अज्ञान) के विद्या (ज्ञान) से नाश होने पर उमड़ता है

जैसा उपनिषदों में कहा गया है: तमसो मा ज्योतिर्गमय — मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो।

विधि और अनुष्ठान

  • घर के अंदर और बाहर मिट्टी के दीये जलाना
  • दिवाली की रात माँ लक्ष्मी की पूजा
  • आतिशबाजी और फुलझड़ी
  • परिवार और पड़ोसियों को मिठाई और उपहार बाँटना
  • घर की सफाई और सजावट करना — लक्ष्मी जी का स्वागत
  • दरवाजे पर रंगोली बनाना
  • नए वस्त्र और आभूषण धारण करना

उपवास

इस त्योहार पर आमतौर पर उपवास नहीं रखा जाता।

कहाँ मनाया जाता है

Pan-IndiaWorldwide Hindu diaspora

Frequently Asked Questions

What is दिवाली?
प्रकाश का त्योहार — भगवान राम की अयोध्या वापसी, अंधकार पर प्रकाश की विजय, अज्ञान पर ज्ञान की विजय और बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव।
When is दिवाली celebrated?
दिवाली is celebrated on 2026-10-20 and is observed in Pan-India, Worldwide Hindu diaspora.
What rituals are performed during दिवाली?
Key rituals include: घर के अंदर और बाहर मिट्टी के दीये जलाना, दिवाली की रात माँ लक्ष्मी की पूजा, आतिशबाजी और फुलझड़ी, परिवार और पड़ोसियों को मिठाई और उपहार बाँटना, घर की सफाई और सजावट करना — लक्ष्मी जी का स्वागत, दरवाजे पर रंगोली बनाना, नए वस्त्र और आभूषण धारण करना.
Is fasting observed during दिवाली?
Fasting is not typically required during दिवाली, though some devotees may choose to fast as personal practice.

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